बिहार में एक और घोटाला : हारे हुए खिलाड़ियों को चैंपियन बता दिया खेल सम्मान








हाजीपुर/पटना. बिहार में टॉपर घोटाले के बाद अब खेल सम्मान घोटाला सामने आया है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने नेशनल पारा एथलेटिक्स में बिना मेडल जीते ही दिव्यांग खिलाड़ियों को खेल सम्मान से नवाज दिया। ऐसे 6 खिलाड़ियों की पूरी जानकारी दैनिक भास्कर के पास है, जिन्हें 16वें सीनियर नेशनल पारा एथलेटिक्स का विनर बताकर खेल पुरस्कार दिए गए। जानिए कैसे हुआ घोटाला...
- जिन्हें सम्मान दिया गया उनमें से किसी ने भी पंचकुला हरियाणा में हुई प्रतियोगिता में कोई मेडल नहीं जीता। कुछ ने तो प्रतियोगिता में भाग ही नहीं लिया।
- आशंका है कि खेल पुरस्कारों का यह खेल कई सालों से चल रहा है। लेकिन इस बार नेशनल विनर्स की सूची इंटरनेट पर डाले जाने के बाद असली विनर्स से मिलान करने पर खुलासा हुआ।
- इसकी जानकारी खेल सम्मान समारोह से पहले ही खेल प्राधिकरण के अधिकारियों को मिल गई थी। लेकिन मामले को दबाया गया।
- दरअसल, खेल पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिलने में आसानी होती है। आशंका है कि यह पूरा घोटाला भी इसी लिए किया गया।
- बिहार सरकार ने 2007 से इन पुरस्कारों की शुरुआत की थी। इसमें अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक पाने वाले खिलाड़ियों को अधिकतम 5 लाख तक की राशि भी दी जाती है।
- पुरस्कार कई श्रेणियों में दिए जाते हैं। पिछले सालों में प्रदेश में खेल पुरस्कार प्राप्त कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं।
- खेल पुरस्कारों के सहारे ऐसे कितने लोगों को सरकारी नौकरी मिली, इसकी सही संख्या जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
- पिछले सप्ताह 29 अगस्त को खेल दिवस पर बिहार सरकार ने राज्य के 359 खिलाड़ियों को खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया था।
ऐसे हुआ घोटाला
- बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ है। आवेदनों की जांच का जिम्मा इन्हीं के पास है।
- प्रमाण पत्रों की सत्यता जांचने में जिला खेल पदाधिकारी व खेल सचिव कार्यालय की भूमिका अहम है।
- आमतौर पर कोच, प्रशिक्षक, सिलेक्टर्स से काजगात वेरीफाई कराए जाते हैं।
- विनर्स की सूची वेबसाइट पर नहीं होने से फर्जी खिलाड़ियों को खेल पुरस्कार दिए जाते रहे, लेकिन इस बार विजेताओं की सूची वेबसाइट पर जारी हो गई।
कैसे मिलता है खेल सम्मान
- इसके लिए सरकार खेल सम्मान समारोह से दो तीन माह पहले राज्य के खिलाड़ियों से आवेदन लेती है।
- आवेदन में किसी खेल में क्या उपलब्धि है यह खिलाड़ी को प्रमाण पत्र के साथ देना पड़ता है।
- उक्त प्रमाण पत्र को जिला खेल पदाधिकारी अथवा संबंधित खेल के सचिव से अनुप्रमाणित करवाना पड़ता है।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक अरविंद पांडे से सीधी बात
सवाल : क्या आपको इस मामले की जानकारी है?
जवाब : हां मुझे इस बात की जानकारी खेल सम्मान समारोह वाले दिन मिली। बड़ा आयोजन था इस वजह से उस दिन विभाग की तरफ से कुछ भी नहीं किया गया।
सवाल : क्या खेल की अन्य कैटेगरी में मिले पुरस्कार में भी इस तरह के मामले होंगे?
जवाब : ऐसा तो नहीं होना चाहिए। फिर भी सभी की जांच कराई जाएगी। ज्यादातर वेरिफाई होकर ही आते हैं।
सवाल : किस स्तर पर चूक हुई है?
जवाब : यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। इस मामले की पूरी गहनता से जांच की जा रही है।
सवाल : जिन खिलाड़ियों ने गलत तरीके से पुरस्कार ले लिए हैं उनपर क्या कार्रवाई होगी?
जवाब : फर्जी पाए गए खिलाड़ियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संभव है कि उनके खेलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाए।


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