सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि बहुत सारे अन्य देशों में भी अंधविश्वास से जुडी़ बातों पर यकीन किया जाता है। बोलिविया में भी आपको कुछ ऐसा सुनने को मिलेगा जिस पर विश्वास करना आपके लिए शायद थोड़ा मुश्किल काम हो। वहां के लोगों में यह विश्वास है कि घर को बनवाने समय लामा नामक प्राणी के भ्रूण को सुखाकर नींव में गाड़ा जाना बहुत जरूरी है, जिससे घर मेंसुख शांति बनी रहती है। हैरानी की बात तो यह है कि जादू-टोना से जुड़े बाजारों में लामा के भ्रूण खुलेआम बिकते है। यहां के लोगों की दिनचर्या काफी अंधविश्वासों में उलझी पड़ी है। यूनेस्कों द्वारा निरक्षता सेमुक्ति पानेके बाद भी लोगों में जागरुकता का अभाव आम देखने को मिलता है। यहां असंतुलित आहार के कारण 30 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार है।
गरीबी की वजह से बोलिविया के लोग खासकर बच्चे सेहत की समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां तीन साल तक की उम्र के 30 फीसदी बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं। साथ ही यहां नवजातों की मृत्युदर भी 68 से 75 फीसदी के बीच है। यहां के लोग आलू के बड़े शौकीन है सालभर में यहां हर व्यक्ति औसतन 92 किलोग्राम आलू खा जाता है। इसके अलावा इन्हें पूरे साल में करीब 32 किलो चावल और अलग-अलग तरह का 55 किलो मांस का इस्तेमाल होता है। फुटबाल यहां के लोगों का मनपसंद गेम हैलेकिन ‘फुटबॉल डे सलोन’ का जुनून इस पर भारी है। गेंद को ठोकर तो इस खेल में भी मारी जाती है लेकिन इसका मैदान बास्केटबॉल कोर्ट की तरह होता है। साथ ही गेंद आकार में छोटी होती है।
यहां टिंकु नाम का त्योहार मनाया जाता है जिसमें लोग बिना हथियार के एक दूसरे से लड़ाई करते हैं। यहां मां और पिता दोनों का सरनेम इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि पिता का सरनेम पहले होता है। किसी खास मौके पर महंगे तोहफों की जगह फूलों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन पीले और बैंगनी रंग के फूलों को अशुभ माना जाता है।

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