कोटा.बादशाह अकबर के नाती और शाहजहां के बेटे शाह शुजा का चलाया हुआ चांदी का सिक्का राजस्थान के कोटा में 7 लाख रुपए में नीलाम हुआ। ऐसे ही दूसरे सिक्के के लिए 6 लाख 60 हजार रुपए की बोली लगी। शाह शुजा (23 जून 1616-7 फरवरी 1661) के चलाए हुए 400 साल पुराने ऐसे 5 ही सिक्के अभी मौजूद हैं। 400 साल पुराने सिक्के की ये है खासियत...
- 11.20 ग्राम और 21.02 मिमी व्यास के दो सिक्के लंदन म्यूजियम और तीन भारत में हैं।
- शनिवार को दो दिवसीय क्वाइन एवं फिलेटली एग्जीबिशन में हुई नीलामी में इनमें से दो सिक्के नीलाम हुए।
- मुंबई राजगौर ऑक्शन के डायरेक्टर डॉ. दिलीप राजगौर ने बताया कि शाहजहां के चार बेटे दारा शिकोह , शाह शुजा, औरंगजेब और मुराद बख्श थे।
- शाहजहां की मृत्यु के समय शाह शुजा ने पटना में ही अपने आप को राजा घोषित कर दिया था।
- चांदी का यह सिक्का पटना टकसाल में गढ़ा गया था। सिक्के में एक तरफ कुरान की आयत लिखी है तो दूसरी तरफ शाह शुजा मुहम्मदी बादशाह गाजी लिखा है।
नागावंश के 13 राजाओं के सिक्के पहली बार हुए प्रदर्शित
- क्वाइन एवं फिलेटली एग्जीबिशन में अवध, ग्वालियर, मैसूर, बड़ौदा, हैदराबाद, मराठा, विक्टोरिया, सुल्तान व अन्य घरानों की मुद्राएं प्रदर्शित की गई हैं।
- एडवोकेट शैलेष जैन द्वारा पहली बार नागा वंश के 13 राजाओं के सिक्के प्रदर्शित किए गए। इनका काल 210-340 ईस्वी का है। उस समय की भाषा संस्कृत थी।
- जैन ने बताया कि अभी तक इस वंश के 11 राजाओं को तलाशा गया है, लेकिन उन्होंने सिक्कों की तलाश कर दो राजाओं के नाम और खोजे हैं। इनमें स्वर्भा नागा और ईश्वर नागा हैं।
- उन्होंने बताया कि ये सिक्के 1800 साल पुराने हैं। इनके अलावा पुराने मनके, घड़ियां, हथियारों का भी डिस्पले किया गया।
- राजस्थान की 18 एवं देश की 65 रियासतों के समय के सिक्के, नोट एग्जीबिशन में हैं। वहीं 250 से अधिक क्वाइन कलेक्टर ने भाग लिया।
- फिलेटली एवं न्यूमिस्मैटिक सोसायटी के चेयरमैन लकेश दंदोना एवं अध्यक्ष श्रीनारायण चांडक ने बताया कि प्रदर्शनी का शुभारंभ निगम आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते ने किया।
- मुंबई के डॉ. दिलीप राजगौर, रोटरी क्लब के अध्यक्ष संजय शर्मा एवं सचिव प्रीतम गोस्वामी भी मौजूद रहे। क्वाइन कलेक्टरों को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए।
सोने के चित्रों से उकेरी है श्रीमद् भागवत
- पंजाब से आए परमेंद्रसिंह ने 175 साल पुरानी पंजाबी में लिखी श्रीमद् भागवत कथा का प्रदर्शन किया गया।
- यह जम्मू के राजा महाराजा रणजीतसिंह के समय की दुर्लभ कृति है।
- इसका लेखन भाई गुलाबसिंह ने केसरसिंह से करवाया था। इसमें कुल 720 पेज है। 20 में सोने से उकेरी पेंटिंग हैं।

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