ग्वालियर।30 सितंबर को स्व. माधवराव सिंधिया की डेथ एनिवर्सरी मनाई जा रही है। इस अवसर पर आपको सिंधिया वंश के उस खजाने के बारे में बताया जा रहा है, जिसे 'गंगाजली' के नाम से जाना जाता है। ये खजाना आज भी ग्वालियर किले के तहखानों में दबा हुआ है। क्या है इस खजाने की कहानी...
‘गंगाजली’ तक पहुंचने के लिए जरूरी था ‘बीजक’
-इस खजाने को सिंधिया महाराजाओं ने किले के कई तहखानों में सुरक्षित रखवा दिया था।
-इन तहखानों को ‘गंगाजली’ नाम दिया गया था।
-यहां तक पहुंचने के रास्तों का रहस्य कोड वर्ड के तौर पर ‘बीजक’ में महफूज रखा गया।
-जयाजीराव ने 1857 के संघर्ष के दौरान बड़ी मुश्किल से पूर्वजों के इस खजाने को विद्रोहियों और अंग्रेज फौज से बचा कर रखा।
सिर्फ महाराजा जयाजीराव को मालूम था ‘बीजक’ का रहस्य
-‘बीजक’ का रहस्य सिर्फ महाराजा जानते थे।
-1857 के गदर के दौरान महाराज जयाजीराव सिंधिया को यह चिंता हुई कि किले का सैनिक छावनी के रूप में उपयोग कर रहे अंग्रेज कहीं खज़ाने को अपने कब्जे में न ले लें।
-साल 1886 में किला जब दोबारा सिंधिया प्रशासन को दिया गया, तब तक जयाजीराव बीमार रहने लगे थे।
-वे अपने वारिस माधव राव सिंधिया 'द्वितीय' को इसका रहस्य बता पाते, इससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गई।

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