जफारिया.पिछले 18 महीने से यमन में सरकार और हाउती विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है। ये संघर्ष सिविल वॉर का रूप लेता जा रहा है। इसमें हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 76 लाख लोगों को घर छोड़ना पड़ा। लेकिन यहीं के कुछ गांव इस खूनखराबे से अछूते हैं। ये गांव रेमाह प्रॉविन्स के जफारिया जिले में धलमलाम पहाड़ के ऊपर बसे हैं।डॉक्टर के पास जाने के लिए चलना पड़ता है 8 घंटे पैदल...
- यहां रह रहे लोगों की जिंदगी देश में चल रहे संघर्ष और खूनखराबे से जरूरी अछूती है, लेकिन आसान नहीं है।
- देश से कटी हुई इस कम्युनिटी के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती से कम नहीं है।
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां रह रहे लोगों ने बिजली और पानी की सप्लाई जैसी की सुविधाओं का फायदा कभी जाना ही नहीं।
- यहां रह रहे लोग खुद ही चक्की में आनाज पीसते हैं औऱ लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकता हैं।
- खाने पीने और जरूरत के बाकी सामान यहां पैदल या केबिल कार के जरिए लाए जाते हैं। मेडिकल फैसिलिटी की यही जरिया है।
- प्रेग्नेंट महिला और चलने में असमर्थ मरीजों को इलाज के लिए पैदल स्ट्रेचर के जरिए ही ले जा सकते हैं। इसमें करीब 8 घंटे का सफर तय करना पड़ता है।
- यहां रहने वाले 65 साल के मोहम्मद यहया हैदर ने कहा कि जिंदगी इतनी मुश्किल होने के बाद भी हम उसी तरह रहते आ रहे हैं, जैसे हमारे पिता और पूर्वज रहे।
- हैदर ने कहा कि हम भी उन्हीं की तरह कॉफी और अनाज उगाते हैं। हम भी इन तमाम मुश्किलों के साथ जीने के आदी हो गए हैं।

EmoticonEmoticon