अमेरिका के न्यूजर्सी में बन रहा यह है दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर









अहमदाबाद। बोचासणवासी अक्षरपुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्थान (बीएपीएस) के प्रमुख स्वामी महाराज शांतिलाल पटेल जी का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शनिवार शाम करीब 6 बजे अंतिम सांस ली। काफी दिनों से वे बीमार चल रहे थे।वडोदरा के एक गांव में हुआ था शांतिलाल का जन्म...
- स्वामी जी महाराज का जन्म 7 दिसंबर 1921 को वड़ोदरा जिले में पादरा तहसील के चाणसद गांव में हुआ था। स्वामी महाराज ने युवावस्था में ही आध्यात्म का मार्ग अंगीकार कर लिया था।
- वे शास्त्री महाराज के शिष्य बने और 10 जनवरी 1940 को नारायणस्वरूपदासजी के रूप में उन्होंने अपना आध्यात्मिक सफर शुरू किया।
- साल 1950 में मात्र 28 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने बीएपीएस के प्रमुख का पद संभाल लिया था।
- इस समय बीएपीएस में उनकी उम्र की तुलना में अनेकों बड़े संत थे, लेकिन प्रमुख स्वामी की साधुता, नम्रता, करुणा और सेवाभाव के चलते ही उन्हें यह पद दिया गया था।
न्यूजर्सी में उन्हीं की देखरेख में बन रहा था सबसे बड़ा मंदिर
- 900 से ज्यादा हिंदू मंदिर बनाने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्वामी महाराज के नाम दर्ज है। उन्होंने 9090 संस्कार केन्द्र शुरू किए और 55000 हजार स्वंयसेवक तैयार किए।
- अमेरिका के न्यूजर्सी में बन रहा एक मंदिर तो दुनिया में हिंदुओं के सबसे बड़े मंदिर के रूप में आकार ले रहा है। यह मंदिर 162 एकड़ में बनाया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य 2017 तक पूरा होगा।

भारत के बाहर बन रहा पहला सबसे बड़ा मंदिर होगा...
न्यूजर्सी (अमेरिका) के रॉबिंसविले में स्थित स्वामीनारायण संप्रदाय का यह मंदिर भारत के बाहर बन रहा पहला सबसे बड़ा मंदिर होगा। अमेरिका में न्यूजर्सी उन स्थानों में शामिल है, जहां भारतीयों की सबसे ज्यादा आबादी है। मंदिर का निर्माण बोचासनवासी अक्षर पुरषोत्तम स्वामीनारायण संस्था करवा रही है। लगभग 162 एकड़ में निर्मित इस मंदिर की कलाकृति में प्राचीन भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। न्यूजर्सी के रॉबिंसविले में स्थित स्वामीनारायण संप्रदाय का यह मंदिर यह मंदिर 134 फुट लंबा और 87 फुट चौड़ा है। इसमें 108 खंभे और तीन गर्भगृह हैं। मंदिर शिल्पशास्त्र के मुताबिक बनाया गया है। दो साल पहले बीएपीएस के सर्वेसर्वा स्व. प्रमुख स्वामी महाराज द्वारा मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी।
1.8 करोड़ यूएस डॉलर (लगभग 108 करोड़ रुपए) की लागत से निर्माणित इस मंदिर में 68 हजार क्युबिक फीट इटालियन करारा मार्बल का उपयोग किया जाएगा। श्री स्वामीनारायण मंदिर की कलात्मक डिजाइन के लिए 13,499 हजार पत्थरों का उपयोग होगा। पत्थरों पर नक्काशी का पूरा काम भारत में ही करवाया जा रहा है। नक्काशी का काम पूरा हो जाने के बाद इन्हें समुद्री रास्ते से न्यूजर्सी पहुंचाया जा रहा है।
1000 सालों तक यूं ही खड़ा रहेगा मंदिर:
अमेरिकन पत्रकार स्टीव ट्रेडर ने बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर के दर्शन कर न्यूजवर्क्‍स साइट पर लिखा है, ‘मंदिर में प्रवेश करने के बाद अद्भुत कलाकृतियों पर से नजरें हटाना बहुत मुश्किल है। इसके अलावा मंदिर के इंटीरियर के अलावा आउटर भी इस तरह तैयार करवाया जा रहा है कि यह मंदिर 1000 सालों तक यूं ही खड़ा रहेगा।


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