जयपुर.तीन दिन गुपचुप जयपुर घूमने के बाद भारत की स्टार तीरंदाज दीपिका कुमारी मंगलवार को जमशेदपुर रवाना हो गईं। रियो ओलिंपिक में हिस्सा लेने के बाद वे जयपुर आई थीं। गुलाबीनगर में उन्होंने अपने तीरंदाज साथी रजत चौहान की गाड़ी ली और निकल गईं जयपुर की सैर को। जयपुर में उन्होंने हवामहल, जलमहल, आमेर का किला और कई स्थानों पर गईं। बता दें की दीपिका कुमारी के पिता एक ऑटो ड्राइवर हैं और आज भी ये काम कर रहे हैं।क्यों जयपुर घूमने आईं दीपिका...
- एसएमएस स्टेडियम के तीरंदाजी मैदान पर हुई मुलाकात में उन्होंने कहा, ‘रियो की बुरी यादों को दूर करने के लिए मैंने जयपुर घूमने का प्लान बनाया।
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- उन्होंने यहां आकर थोड़ा रिलेक्स महसूस किया। अब वे फिर से 2020 टोक्यो ओलिंपिक की तैयारियों में लग जाएंगी।’
2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद आप चर्चा में आईं। उस समय यह खबर हर तरफ चर्चा में थी कि एक ऑटो ड्राइवर की बेटी ने मेडल जीता। आजकल आपके पापा क्या करते हैं?
- इस पर दीपिका ने ‘गर्व से कहा कि आज भी मेरे पापा ऑटो ही चलाते हैं।
- मैंने कई बार कहा भी कि पापा अब मैं कमाती हूं तो आपको ऑटो चलाने की क्या जरूरत तो उनका सीधा जवाब होता है। अगर मैं तुमसे कहूं कि तुम तीरंदाजी छोड़ दो तो क्या तुम छोड़ दोगी, तो फिर मैं ऑटो चलाने क्यों छोड़ूं।’
- बता दें की दीपिका की मां एक प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्स हैं।
- अर्जुन अवॉर्ड पा चुकीं दीपिका ने 2011 से 13 तक लगातार 3 वर्ल्ड कप में रजत पदक अपने नाम किए थे।
- पैसे की तंगी के चलते कभी दीपिका कुमारी बांस के धनुष और तीर से तीरंदाजी की प्रैक्टिस किया करती थीं।
खिलाड़ी के लिए तपस्या होता है ओलिंपिक
- क्या ओलिंपिक का प्रैशर अन्य टूर्नामेंट से अलग होता है, पूछने पर कहती हैं, ‘यह सच है। देश के हर शख्स की निगाहें खिलाड़ियों के ओलिंपिक प्रदर्शन पर रहती है। प्रैशर तो होता ही है।
- वैसे भी खिलाड़ी के लिए तपस्या की तरह होता है ओलिंपिक।
- हमने भी अपने तरफ से बेस्ट प्रदर्शन करने की कोशिश की। कोई बात नहीं, इस बात नहीं तो अगली बार।’

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