झाड़-फूंक से चली गई 7 बच्चों की जान, डॉक्टर नहीं पहुंचे इलाज करने गांव


चाईबासा(जमशेदपुर)। कंटोडिया गांव में मलेरिया से पीड़ित सात बच्चों की जान झाड़ फूंक के चक्कर में चली गई। ये मौतें पिछले पंद्रह दिनों में हुई हैं। मरने वालो में ज्यादातर बच्चे हैं। लगभग डेढ़ दर्जन बच्चे अभी इस बीमारी से आक्रांत हैं। गांव के बड़े-बूढ़ों की सलाह मान कर ग्रामीण अब भी झाड़- फूंक से इलाज करा रहे हैं। डॉक्टर इलाज करने नहीं पहुंचे गांव...- बड़ाजामदा उप स्वास्थ्य केंद्र को इस बीमारी के बारे में पहले ही सूचना दे दी गई थी, परंतु इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई डॉक्टर गांव में नहीं पहुंचा।- शनिवार को बीमार बच्चों के खून का सैंपल लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि स्वास्थ्य विभाग पहले से सजग रहता तो इन बच्चों की मौत नहीं होती।- शुरुआत में बच्चों के शरीर पर दाने उभर आए थे और सभी सुस्त हो गए थे। इसके बाद उनकी मौत हो गई।डेढ़ दर्जन बच्चे अभी भी हैं पीड़ित- कंटोडिया गांव में 80 घर हैं और यहां की आबादी लगभग 500 है। बड़ाजामदा से बिल्कुल सटा होने के बावजूद इतनी मौतें हो गईं।- स्वास्थ्य विभाग का लचर रवैया हैरान करने वाला है।- खबर पाकर शनिवार की दोपहर में स्वास्थ्य विभाग की आईडीएसइ टीम कंटोडिया पहुंची और वहां से खून का सैंपल लिया।- सैंपल को जांच के लिए बाहर भेज दिया गया है। टीम के अनुसार दूषित पानी पीने से ऐसा हो सकता है।इनकी हुई मौतचूड़ी सिरका, उम्र आठ वर्ष (पिता ताना सिरका),राम सिरका, उम्र चार वर्ष (पिता ताना सिरका), रेमसे सुरेन, उम्र डेढ़ साल (पिता श्रीराम सुरेन),सुनीबारी सिरका, उम्र छह साल (पिता जोटी सिरका),मुंगड़ु सिरका, उम्र साढ़े चार साल (पिता पीरो सिरका),जड़िया सिरका, उम्र डेढ़ साल (पिता सुनिया सिरका) और बुधनी सुरेन, उम्र डेढ़ (साल पिता बुधराम सुरेन)।


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