BIHAR : गंगा ने तोपटना. बिहार में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। गंगा, सोन समेत पुनपुन उफान पर है। गंगा ने 40 सालों का अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं। यह हाल तब है जब बिहार में कम बारिश हुई है। पटना सहित प्रदेश के कई शहर और गांवों में नदियों का पानी घुस गया है। सूबे में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पटना में ऐसा नजारा इससे पहले 1975 में देखने को मिला था। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने सेना और वायुसेना से तैयार रहने का अनुरोध किया है। NDRF की 5 टीम पटना पहुंच चुकी हैं। कैसे है प्रदेश के हालात...
- इस बार बिहार में बाढ़ के हालात दूसरे राज्यों में हुई तेज बारिश के बाद खराब हुए हैं। गंगा खतरे के निशान से डेढ मीटर ऊपर बह रही है।
- पटना से सटे नकटादियारा पूरी तरह से गंगा में समा गया है। यहां अभी भी करीब तीन हजार से ज्यादा लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं।
- पटना के गांधी घाट के पास लोगों के कमर से ज्यादा पानी प्रवेश कर गया है। एलटीसी घाट के आस पास रहने वाले लोगों के घर में पानी प्रवेश कर गया है।
1975के बाद सोन से दूसरी बड़ी तबाही
- 1975 के बाद दूसरी बड़ी तबाही लेकर पहुंची है सोन नदी। शनिवार की सुबह तीन बजे 11 लाख 67 हजार घन क्यूसेक पानी इंद्रपुरी बराज पहुंचा।
- इससे पहले 1975 में अब तक का रिकार्ड 14 लाख 48 हजार घन क्यूसेक पानी पहुंचा था, जिससे भारी तबाही मची थी।
- सोन में आए उफान के कारण सौ गांवों में पानी घुस गया है। सासाराम और औरंगाबाद के 25 ऐसे गांव हैं जिनका मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है।
- 40 वर्षों के बीच दूसरी सबसे बड़ी तबाही में नौहट्टा से लेकर काराकाट तक सोन के किनारे रहने वाले लोगों ने प्रशासन से हेल्प मांगी है।
- रोहतास और नौहट्टा के बीच सोन नदी के लगभग छह टीलों पर तीन सौ से ज्यादा लोग फंसे हुए थे, जिनमें से दो सौ को प्रशासन ने निकाल लाने का दावा किया है।
सारण में डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित
- सारण में पहले से बाढ़ आई ही थी, इसी बीच शुक्रवार की रात इंद्रपुरी बराज से 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले में 1971 से भी भीषण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
- लोगों की मानें तो 1971 की अपेक्षा आज के समय में शहर के दक्षिण स्थित सरयू नदी के किनारे वाले सड़कों की उंचाई 10 फीट से अधिक हो गई है। डीएम ने बाढ़ की भीषण स्थिति को देखते हुए शनिवार को आपात बैठक बुलाई और कई आदेश जारी किया है।
- उन्होंने एनएच-19 पर तीन से चार फीट पानी को बहता देख छपरा-पटना रोड पर यातायात बंद कर दिया है और गड़खा-भेल्दी-बसंत रोड का उपयोग करने को कहा है। छपरा के दक्षिण स्थित रिविलगंज प्रखंड के दर्जनभर गांव बाढ़ में पूरी तरह से बह गए हैं।
- पटना जिला के 25 पंचायतों में फिलहाल बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इससे करीब एक लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
कर्मचारियों की छुट्टी रद्द
सरकार ने कर्मचारियों की सभी छुट्टी को रद्द कर दी है। पानी की वर्तमान स्थिति को देखने के बाद जिला प्रशासन स्कूलों की छुट्टी पर आज फैसला करेगी। जिला प्रशासन की ओर से शनिवार और रविवार को होने वाली गंगा आरती पर भी रोक लगा दी थी। गंगा का पानी गांधी घाट के पास शहर में प्रवेश कर गया है।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही ये नदियां
गंगा पटना के दीघा घाट, गांधी घाट और हाथीदह के अलावा भागलपुर के कहलगांव में, सोन कोईलवर और मनेर में, पुनपुन श्रीपालपुर में, घाघरा सिसवन में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में और कोसी बलतारा व कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
NDRFकी5टीमें चेन्नई से पटना पहुंची
बाढ़ के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने चेन्नई से एनडीआरएफ की पांच टीमें मंगी थी। ये टीम आज सुबह पटना पहुंच गई है। पटना में एनडीआरएफ की चार अतिरिक्त टीमें पहले से तैनात हैं। ये बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में लगी हैं।
ये है आपदा प्रबंधन का हेल्पलाइन नंबर
आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। विभाग का राज्य आपदा ऑपरेशन केन्द्र 24 घंटे कार्यरत रहेगा। इन नंबरों पर बाढ़ से संबंधित सूचना दी जा सकेगी। ये नंबर हैं - 0612-2217301, 2217302, 2217303, 2217304, 2217305.
40 साल का रिकॉर्ड, ऐसे हैं यहां बाढ़ के हालात

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