जालंधर. वो उम्र में छोटी है, लेकिन हौसले बड़े हैं। ना बेटी होने पर कोई शर्म है और ना ही उपेक्षित परिवार में पैदा होने पर। उसका गीत फिर कि होया जे मैं धी हां और डेंजर चमार के लाखों व्यूअर्स हैं। वह अपनी जाति के अपने मायने समझाती है और इसी को अपने गीतों में पेश करती है। जानिए, 17 साल की गिन्नी की कहानी...
- 17 साल की गिन्नी माही अपने गीतों में दलितों का गौरव गर्व से पेश करती है। वो ऐसे शहर से है, जहां पर जातिवाद के कारण मात्र डेढ़ किलोमीटर के दायरे में सात शमशानघाट हैं और उनके बीच रहते हुए गिन्नी गाती है।
यूट्यूब पर छाए गीत...
-गिन्नी का एक गीत कुर्बानी देनो डरदे नहीं, रैंहदे है तैयार, हैगे असले तो वड्डे डेंजर चमार। यूट्यूब पर उनके गीत इन दिनों हॉट केक हैं।
-गिन्नी पहली कलाकार नहीं है, जिन्होंने इस तरह के गीत गाए हैं। मुंडे चमारां दे जैसे कई गीत पहले से ही यूट्यूब पर हिट हैं।
-चमकीला, राम लाल धीर, जेएच ताजपुरी, राज डडराल, रानी अरमान जैसे कलाकार पहले भी दलित जातियों से संबंधित किस्से गर्वीले अंदाज में गा चुके हैं।
12वीं 77 फीसदी अंक किए हासिल...
- गिन्नी कहती हैं कि दलित समाज में होने वाले भेदभाव, अत्याचार आदि को समाप्त कर नई जाग्रती लाना चाहती है।
-गिन्नी बाबा साहेब अम्बेडकर के विचारों से काफी प्रभावित है, जो उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचा रही है।
- वो म्यूजिक ब्रांड चमार पॉप के लिए गाती हैं। उनके गानों में पंजाबी लोकगीत होते हैं, रैप होता है, हिप-हॉप होता है और साथ होती है उनकी कदमों की थाप।
- गुरकनवाल भारती को अब दुनिया गिन्नी माही के नाम से जानती है। अगर आपने गिन्नी के गाने नहीं सुने तो बहुत कुछ मिस कर दिया है।
- माही ने महज 7 वर्ष की उम्र में ही गाना शुरू कर दिया, लेकिन उनको पहचान मिली 17 साल की उम्र में।

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