गोरखपुर.देश को 8 इंटरनेशनल और 50 नेशनल खिलाड़ी देने वाले इमरान आज गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। वह घर का खर्च चलाने और बेटी की शादी के लिए घर-घर जाकर स्पोर्ट्स किट्स बेचते हैं। क्योंकि शादी के लिए काफी पैसा चाहिए लेकिन मौजूदा समय में उनके खाते में सिर्फ 5 हजार ही बचे हैं।बता दें की इस खबर के बाद यूपी सरकार में प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल ने रिट्वीट कर कहा है, यूपी सरकार मामले पर संज्ञान लेगी और खिलाड़ी की पूरी मदद करेगी। साथ ही उन्होंने खबर करने के लिए धन्यवाद भी कहा है।
खबर खेल कोटे से नौकरी भी मिली, लेकिन नहीं मिला फायदा...
- 62 साल के इमरान जौनपुर जिले के अबीरगढ़ टोला थाना कोतवाली जौनपुर के रहने वाले हैं।
- इमरान और पत्नी यास्मीन जहां के दो बच्चे मो. आमिर और उज्ज्मा यास्मीन हैं।
- गोरखपुर के इमरान ने अब तक 8 अंतरराष्ट्रीय और 50 से अधिक राष्ट्रीय खिलाड़ी (महिला-पुरुष) भारत को दिए हैं।
- इन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम की वाइस कैप्टन रहीं निधि खुल्लर, संजू ओझा, रजनी चौधरी, रीता पांडेय, प्रवीन शर्मा, सनवर अली, जनार्दन गुप्ता और प्रतिभा चौधरी जैसे कई खिलाडि़यों को हॉकी की ट्रेनिंग दी।
रोजी-रोटी की तलाश में आ गए गोरखपुर
- 1973 मेंं रोजी रोटी की तलाश में वे गोरखपुर आ गए। यहां के खाद्य कारखाने में स्पोटर्स कोटे से नौकरी मिल गई।
- नौकरी के साथ इन्होंने हॉकी की ट्रेनिंग देना भी जारी रखा।
- 31 दिसंबर 2002 में खाद्य कारखाना अचानक बंद हो गया और नौकरी चली गई।
- भारत सरकार की तरफ से इन्हें 900 रूपए पेंशन मिलता है।
- खिलाड़ियों के लिए लोअर बनाने का कारखाना शुरू किया, लेकिन पैैसे अभाव में यह भी बंद हो गया।
- कारखाने से 200 प्रतिदिन और 6000 रुपए महीने तक की आमदनी हो जाती थी।
बेटी की शादी की है टेंशन, घर-घर बेच रहेे स्पोर्ट किट
- इस समय वह घर-घर जाकर स्पोर्ट किट बेचते हैं। वैसे ज्यादारतर किट वहां ले जाकर बेचते हैं, जहां कोई टूर्नामेंट हो रहा होता है। किट बेचने पर कमीशन मिलता है। कभी 3 हजार तो किसी महीने में 1 हजार रुपए भी नहीं मिलता।
- बेटे आमिर ने दो साल से परिवार के खर्च को संभालना शुरू किया है। वह एक प्राइवेट फर्म में 6 हजार की नौकरी करता है।
- बेटी उज्मा की पढ़ाई पैसों की वजह से पूरी नहीं हो पाई। उसकी शादी भी 7 नवंबर 16 को होनी है।
- इमरान को नींद नहीं आती क्योंकि उनके अकाउंट में 5 हजार रुपये भी नहीं हैं। शादी कैसे होगी उन्हें इस बात की चिंता है।
रियो ओलंपिक पर क्या कहते हैं इमरान?
- उनका कहना है कि हॉकी की टीम फिट नहीं है। प्लेयर्स एक साथ हॉकी खेलना नहीं चाहते। वह कलात्मक हॉकी नहीं खेल रहे हैं।
- एक भारतीय हॉकी प्लेयर तीन विरोधी प्लेयर्स को हराकर गोल कर देता था, लेकिन ये अकेले खेलकर गोल करना चाहते हैं।
- टीम के खिलाड़ी हिट एंड रन की हॉकी खेल रहे हैं।
- स्पोर्ट्स कॉलेज और होस्टल खोल देने से हॉकी या किसी खेल का विकास नहीं होगा।
- इमरान का दावा है कि ज्यादा नहीं चार साल उन्हें मौका मिले तो वे हॉकी का हर कप और मेडल दिलाने वाले खिलाड़ी देश को दे सकते हैं।
दादा ध्यानचंद से सीखा है इमरान ने हॉकी का गुर
- इमरान को हॉकी खेलने का शौक बचपन से ही था।
- इमरान ने 70 के दशक में मेजर ध्यानचंद और केडी सिंह से हॉकी सीखी।
- पढ़ाई के दौरान इन्होंने झांसी के गड्ढे वाले मैदान पर हॉकी की बारीकियां सीखीं।
मिले हैं कई सम्मान- गोरखपुर यूनिवर्सिटी से इन्हें गुरुश्री का अवार्ड, राष्ट्रीय गौरव अवार्ड, 'द रीयल हीरो ऑफ सोसायटी' और एक अन्य संस्था ने इन्हें 'मेधावीर अर्जुन' मिले हैंं।
दोस्त ने भेजी है सीएम को फाइल - फाइल सीएम को इसलिए भेजी जिससे शायद इन्हें कहीं पर कोच बना दिया जाए और यश भारती सम्मान भी मिल सके।
कब क्या किया?
- 1970 बीटेन क्लब ऑफ कोलकाता से खेले।
- 1771 केरल स्कूल से नेशनल पार्टिसिपेशन।
- 1972 स्कूल यूपी कैंप झांसी में पार्टिसिपेट किया, इस कैंप में दादा ध्यान चंद ने इमरान को कोच किया था।
- 1973 कटक में हुए यूपी स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में इनकी कप्तानी में टीम चैंपियन रही।
- 1973 स्कूल इंडिया टीम में चयन, 25 दिसंबर को हुए टूर्नामेंट में चैंपियन।
- 30 अप्रैल 1974 फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में स्पोर्ट्समेन ट्रेनीज के पद पर चयन।
- 1975 से 1985 तक फर्टिलाइजर कार्पोरेशन गोरखपुर आल इंडिया इंटर यूनिट में कप्तानी की और लगातार 9 वर्ष तक चैंपियन रहे।
- 1975 आल इंडिया फर्टिलाइजर की टीम की अगुवाई करते हुए गुरु नानक हॉकी कप के चैंपियन रहे।
- 10 मई 1987 से फर्टिलाइजर गोरखपुर के ग्राउंड पर निशुल्क हॉकी की कोचिंग शुरू की।

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